Wednesday, January 21, 2009

इक बाजी ज़िन्दगी की.......

मरने की वजह से क्या कोई जीना छोड़ता है???
गम तोह आने जाने है.... क्या कोई हसना भूलता है??
हम रहे या न रहे कल ये दुनिया तो चलती रहनी है.......
उम्मिद की आस धरे बढती रहनी है !
जीना है सब को और खुल के ...
और भी खुश होके....
पाना है बहुत कुछ जी भर के ....
आसमान है हमारा एक दिन जरुर उडेंगे हम....
अपने सपनो को सच बनायेंगे हम...
अब जीत हो या हार ये बाजी ज़िन्दगी की खेल के रहेंगे हम......
सपनो के आगे बढ़ के रहेंगे हम !